आपको ही वोट दूँगा, बार बार हाथ जोड़कर शर्मिंदा न करो ।।


 

विधानसभा चुनाव 2023 का खुमार जोरों पर हैं। ऐसे में वोटरों को रिझाने के लिए प्रत्याशियों की लाइन लगी हैं। विधायक पद के लिए बहुत सारे प्रत्याशी चुनावी मैदान में कूदे हैं। ऐसे में मतदाता भी कन्फूजन में है कि वोट किसे करें, किसे नहीं। पिछली बार के विधायक जी इस बार भी टिकट लाये है। वहीं लंबे समय से टिकट की आस में बैठे कुछ दावेदारों का दिल पार्टियों ने तोड़ दिया तो , नेताजी भी बगावत में उतर आये। कई जगह तो नेताजी को पार्टी से टिकट न मिलने पर खुद अपनो  के खिलाफ मैदान में कूद गये। ये राजनीति है या आगे निकलने की होड़। जनता कन्फूजन में हैं।

कही नए तो कही पुराने दावेदार भी मैदान में है। साथ ही कई  मामलो मे ऐसा भी देखने को मिला की प्रत्याशी जो पद पर थे उन्हे टिकट ना मिला या जो पार्टी बदल कर आये  हुवे उन्हे टिकट मिल गया , कई तो महीनों पहले अपनी तैयारी पुरी कर चुके थे और कही सिर्फ अकड़ मे चुनावी मैदान मे है , ऐसे में जनता भी कन्फूजन में हैं कि ये राजनीति है या कुछ और। कई दावेदार तो ऐसे भी जो हर बार सीट अपनी ही मान बैठे है। लेकिन इस बार प्रदेशभर में युवा वर्ग मैदान मेंं कूदा हैं ऐसे में युवा नई सोच के साथ मैदान में है लेकिन पुराने दिग्गजों को वह पसंद नहीं आ रहे हैं।

अब तो हर प्रत्याशी  दबी जुबान से कहता है की  कल का बच्चा अब हमारा मुकाबला करेगा। पर भाई साहब यह नहीं समझ पा रहे है कि यही राजनीति है। कोई भी मैदार में कूद सकता हैं। छोटा हो या बड़ा सबकों चुनाव लडऩे का अधिकार है। अब चारों तरफ चुनावी शोर हैं। गली-गली, गंाव-गांव पोस्टरों से पट गये है। चारों तरफ नेताजी हाथ जोड़ते नजर आ रहे हैं। अब तो पोस्टर देखकर ये कहने का मन होता है कि भाई इतनी बार हाथ मत जोड़ो। आपकों ही वोट दूंगा। बार-बार हाथ जोडक़र शर्मिदा न करों।


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"उक्त विचार लेखक के निजी विचार है"

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